Filmi Hoon Exclusive: राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार विजेता फिल्मकार सुदीप्तो सेन की मशहूर गायिका और भारत रत्न पुरस्कार विजेता एम एस सुब्बालक्ष्मी पर फ़िल्म बनाने की कोशिशों को करारा झटका लगा है। ‘फ़िल्मी हूं’ के पास इस बात की एक्सक्लूसिव जानकारी है कि इस बारे में सुदीप्तो सेन और नेटफ़्लिक्स प्रबंधन के बीच हुई बैठक में नेटफ़्लिक्स ने इस प्रस्ताव को नकार दिया है।
देश-विदेश में चर्चित फ़िल्म ‘द केरल स्टोरी’ की रिलीज के बाद से इसके निर्देशक सुदीप्तो सेन कई कथानकों पर काम करते रहे हैं। अपनी फ़िल्म ‘द केरल स्टोरी’ के सीक्वल पर भी इसी के चलते उन्होंने काम करने से मना कर दिया था। बाद में इस फिल्म को निर्माता विपुल शाह ने एक नए निर्देशक के साथ बनाया और फ़िल्म ने रिलीज के पहले हफ्ते में ही बॉक्स ऑफिस पर दम तोड़ दिया।
इस कोशिश के अलावा अभिनेत्री साई पल्लवी के भी एम एस सुब्बालक्ष्मी की भूमिका के लिए चुने जाने की खबरें सामने आई हैं। यह प्रोजेक्ट बड़े बजट की योजना के रूप में देखा जा रहा है और इसे निर्देशक गौतम तिन्ननुरी से जोड़ा गया है। हालांकि, इस फ़िल्म को भी अभी सिर्फ प्रस्ताव के दौर में ही माना जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, गौतम तिन्नूरी की फ़िल्म केवल एक जीवन कथा नहीं बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की विरासत को सिनेमाई रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश होगी, जहां एक ऐसी कलाकार की यात्रा दिखाई जानी है, जिसने भारत रत्न तक का सफ़र तय किया।
लगभग एक दशक पहले, सुब्बालक्ष्मी पर एक और महत्वाकांक्षी बायोपिक चर्चा में आई थी। इस फ़िल्म को प्रसिद्ध सिनेमैटोग्राफर-निर्देशक राजीव मेनन निर्देशित करने वाले थे और इसमें विद्या बालन के मुख्य भूमिका निभाने की खबरें थीं। लेकिन यह प्रोजेक्ट शुरुआत से ही विवादों में घिर गया।
‘फ़िल्मी हूं’ के सूत्र बताते हैं कि एम एस सुब्बालक्ष्मी पर फ़िल्म बनाना आसान नहीं है। सुब्बालक्ष्मी के परिवार की आर्थिक संकट के दौरान मदद करने वाले बेंगलुरू के एक नामी कारोबारी के पास उनके लाइफ राइट्स हैं। और, यहां तक कि एम एस सुब्बालक्ष्मी पर लिखी गई एक किताब के अधिकार भी उन्होंने खरीद लिए हैं।
राजीव मेनन इसी के चलते अपनी फ़िल्म शुरू नहीं कर पाए। तब आरोप लगे थे कि बिना उचित अनुमति के फ़िल्म पर काम शुरू किया गया। मामला अदालत तक पहुंचा और अंततः इस परियोजना पर रोक लग गई। इन कानूनी उलझनों के कारण एम एस सुब्बालक्ष्मी पर प्रस्तावित कोई दूसरी फ़िल्म भी कभी फ्लोर पर नहीं आ सकी। बाद में विद्या बालन ने भी इस प्रोजेक्ट से दूरी बना ली।
इन दोनों प्रयासोंको साथ रखकर देखें तो एक पैटर्न स्पष्ट होता है। सुब्बालक्ष्मी के जीवन पर लिखी पुस्तकों, शोध और व्यक्तिगत अभिलेखों के अधिकारों को लेकर कई पक्ष सामने आते रहे हैं, जिससे फ़िल्म निर्माण जटिल हो जाता है। हालांकि, नेटफ़्लिक्स के साथ बैठक में सुदीप्तो सेन ने ये साफ़ किया था कि उनके पास सुब्बालक्ष्मी के जीवन पर फ़िल्म बनाने के सारे कानूनी अधिकार मौजूद हैं।
लेकिन, नेटफ़्लिक्स का भारतीय कार्यालय इन दिनों अपनी नई गाइडलाइन के अनुसार काम कर रहा है। इसके मुताबिक ओटीटी अब किसी बायोपिक पर काम करने को बहुत इच्छुक नहीं है। इस बारे में ओटीटी प्रबंधन से भी ‘फ़िल्मी हूं’ ने संपर्क किया जिसमें सुदीप्तो सेन के साथ बैठक करने की तो पुष्टि हुई लेकिन इससे ज़्यादा कुछ कहने से संबंधित सूत्र ने इनकार कर दिया।






