Krishnavataram: भारतीय अध्यात्म और संस्कृति के केंद्र भगवान श्रीकृष्ण के जीवन को एक सिनेमाई ट्रिलॉजी (तीन भागों की श्रृंखला) के रूप में पेश करने की महात्वाकांक्षी योजना का पहला भाग, ‘कृष्णावतारम’, 7 मई को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रहा है। हार्दिक गज्जर के निर्देशन में बनी यह फिल्म ‘हृदयम’ (The Heart), ‘मनः’ (The Mind) और ‘आत्मन’ (The Soul) नामक तीन अध्यायों में कान्हा के जीवन के अलग-अलग चरणों को दिखाएगी। फिल्म का पहला भाग ‘हृदयम’ भारत के प्रमुख भाषाई बाजारों में रिलीज के साथ ही दो हफ्ते बाद अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा में अंग्रेजी संस्करण के साथ भी पेश किया जाएगा।
नए चेहरे आएंगे नजर
मुख्यधारा के बड़े स्टार्स पर निर्भर रहने के बजाय, ‘कृष्णावतारम’ (Krishnavataram) के निर्माताओं ने एक उभरती हुई रचनात्मक टीम और नए कलाकारों के साथ इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारा है। फिल्म में सिद्धार्थ गुप्ता ‘कृष्ण’ की भूमिका में नजर आएंगे, जबकि संस्कृति जयाना ‘सत्यभामा’, सुष्मिता भट्ट ‘राधा’ और निवाशिनी कृष्णन ‘रुक्मिणी’ के किरदार निभा रही हैं। क्रिएटिवलैंड स्टूडियोज एंटरटेनमेंट और अथश्रीकथा मोशन पिक्चर्स के बैनर तले बनी इस फिल्म को निर्माता एक ‘ग्लोबल डार्क हॉर्स’ के रूप में देख रहे हैं, जो अपनी कहानी की ताकत पर वैश्विक दर्शकों को आकर्षित करने का दम रखती है।
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राजा रवि वर्मा की कला का सिनेमाई स्वरूप
‘कृष्णावतारम’ की सबसे बड़ी खूबी इसका विजुअल ट्रीट है। फिल्म के दृश्यों को 19वीं सदी के महान कलाकार राजा रवि वर्मा की ऑयल पेंटिंग वाली शैली से प्रेरित होकर तैयार किया गया है। यह तकनीक भारतीय आइकनोग्राफी (प्रतिमा विज्ञान) और बड़े पर्दे की भव्यता के बीच एक सुंदर सेतु बनाती है। फिल्म के ट्रेलर्स को अब तक 80 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है, और विशेष रूप से विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदायों के बीच इसे लेकर जबरदस्त उत्साह है।
फिल्म का हो रहा अनूठा प्रचार
फिल्म के प्रचार के लिए पारंपरिक विज्ञापनों के बजाय सामुदायिक जुड़ाव (Community Activation) का रास्ता चुना गया है। मेकर्स ने मंदिरों और विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों के माध्यम से सीधे दर्शकों तक पहुंच बनाई है। निर्माता साजन राज कुरुप का कहना है कि ‘आरआरआर’ और ‘बाहुबली’ जैसी फिल्मों ने भारतीय सिनेमा के लिए वैश्विक द्वार खोल दिए हैं। उनका लक्ष्य भारतीय दिव्य विरासत को उसकी आत्मा को खोए बिना एक वैश्विक सिनेमाई भाषा में ढालना है। यह फिल्म न केवल एक धार्मिक गाथा है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और दर्शन का एक अनूठा संगम है।







