भारतीय मनोरंजन जगत के दो सबसे बड़े खिलाड़ी, ज़ी एंटरटेनमेंट (ZEEL) और रिलायंस-डिज्नी का साझा उपक्रम ‘जियोस्टार’, अब अदालत के कटघरे में आमने-सामने हैं। ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज ने रिलायंस-डिज्नी के जॉइंट वेंचर के खिलाफ कॉपीराइट उल्लंघन का एक बड़ा मामला दर्ज कराया है। रिपोर्ट के अनुसार, ज़ी का आरोप है कि उनके बीच हुआ लाइसेंसिंग समझौता समाप्त होने के बाद भी जियोस्टार ने अवैध रूप से ज़ी म्यूजिक के गानों और कंटेंट का इस्तेमाल जारी रखा। यह कानूनी कदम भारत के तेजी से बढ़ते स्ट्रीमिंग और ब्रॉडकास्टिंग बाजार में मचे घमासान को एक नए स्तर पर ले गया है।
3 मिलियन डॉलर के हर्जाने की मांग और गंभीर आरोप
अदालती दस्तावेजों और रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ज़ी एंटरटेनमेंट ने इस कथित अनधिकृत उपयोग के बदले जियोस्टार से 3 मिलियन डॉलर (करीब 25 करोड़ रुपये से अधिक) के हर्जाने की मांग की है। ज़ी का दावा है कि उनके म्यूजिक डिवीजन के कॉपीराइट वाले कंटेंट का व्यावसायिक लाभ उठाने के लिए जियोस्टार ने अपने स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म और टीवी चैनलों पर बिना अनुमति के गानों का इस्तेमाल किया है। हालांकि, इस विवाद के सार्वजनिक होने के बाद भी ज़ी और जियोस्टार दोनों ही पक्षों ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है और कोई भी आधिकारिक बयान देने से बच रहे हैं।
क्रिकेट और लंदन की अदालत: पुरानी रंजिशों का नया मोड़
यह पहली बार नहीं है जब ये दोनों दिग्गज समूह कानूनी रूप से आपस में भिड़े हों। ज़ी और रिलायंस के बीच पहले से ही लंदन की एक मध्यस्थता अदालत में 1 बिलियन डॉलर (करीब 8,300 करोड़ रुपये) का एक बड़ा केस चल रहा है। उस मामले में रिलायंस ने ज़ी पर क्रिकेट लाइसेंसिंग समझौते से पीछे हटने के कारण भारी हर्जाने का दावा किया था, जिसे ज़ी ने सिरे से खारिज करते हुए लड़ने का फैसला किया है। अब म्यूजिक कॉपीराइट का यह नया मोर्चा खुलने से दोनों कंपनियों के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया है।
कंटेंट की लड़ाई और सिमटता हुआ भारतीय मीडिया बाज़ार
विशेषज्ञों का मानना है कि रिलायंस और डिज्नी के बीच हुए 8.5 बिलियन डॉलर के ऐतिहासिक विलय के बाद बना ‘जियोस्टार’ बाजार में एक एकाधिकार जैसी स्थिति पैदा कर रहा है। ऐसे में ज़ी जैसी कंपनियों के लिए अपने बौद्धिक संपदा (आईपी) और कंटेंट अधिकारों की रक्षा करना अस्तित्व की लड़ाई बन गया है। स्ट्रीमिंग और केबल टीवी के इस डिजिटल युग में कंटेंट ही ‘किंग’ है, और ज़ी का यह कानूनी प्रहार इसी ‘किंग’ के ताज को बचाने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
