मौत की तारीख़ तय है। ये एक बार भले धोखा खा जाए, लेकिन अपना समय फिर भी भूलती नहीं है। कुछ ऐसा ही हुआ, इस अभिनेता के साथ जिसकी तस्वीर यहां इस पोस्ट के साथ लगी हुई है। पहचान तो गए ही होंगे!
जी हां, अभिनेता महावीर शाह। भगवान उनके जैसा हादसा कभी किसी दूसरे के साथ न करे। वह तारीख़ थी 31 अगस्त 2000 और महावीर अपने पूरे समूह के साथ अमेरिका में मौज-मस्ती करने निकले थे। अचानक तेज़ धमाका हुआ। उनकी कार को पीछे से एक दूसरी कार ने ज़ोरदार टक्कर मार दी थी।
टक्कर इतनी भयानक थी कि महावीर शाह को समझ ही नहीं आया कि हुआ क्या? लेकिन अगले ही पल कार में सवार लोगों ने खुद को टटोल कर देखा तो किसी को कोई खरोंच तक नहीं आई थी। सब बाल-बाल बचे थे। लेकिन, महावीर को तो इस एक्सीडेंट में बचना लिखा ही नहीं था।
बस, महावीर शाह को पता नहीं क्या सूझा कि वह अपनी तरफ का कार का दरवाजा खोलकर नीचे उतर आए, ये देखने कि कार को कितना नुकसान हुआ है? अमेरिका के हाईवे या दूसरी सड़कों पर भी, अगर आपने सड़क यात्रा की है तो पता ही होगा कि वहां कारें कितनी रफ़्तार से गुजरती हैं। सब अपनी लेन में होते हैं और ये मानकर चलते हैं कि उनकी लेन में कोई व्यवधान आएगा नहीं, और आएगा भी तो दूर से पता चल जाएगा।
लेकिन, उस दिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। महावीर ने कार दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद ऐसा कोई संकेत नहीं दिया कि वह उतरने वाले हैं। उन्होंने एक झटके से दरवाजा खोला, नीचे उतरे, और अगले ही पल पीछे से आ रही एक तेज़ रफ्तार कार ने उन्हें ठोंक दिया। रफ़्तार से आई कार की टक्कर के साथ ही महावीर शाह वहीं सड़क पर गिर गए। बाहरी चोट इस बार भी कोई नज़र नहीं आ रही थी, लेकिन उन्हें लगा कि शायद दिल का दौरा पड़ने वाला है।
मौत आनी है तो आनी ही है। पहली बार चूक हो गई लेकिन महावीर को उस दिन मरना ही लिखा था, सो पहली बार नहीं सही, दूसरी बार में। दूसरी सीधी टक्कर में महावीर के अंदरूनी अंग फट गए थे। प्राथमिक चिकित्सा के लिए अमेरिका में हेलीकॉप्टर एंबुलेंस की सुविधा भी रहती है, लेकिन वह भी समय से नहीं आ पाई। बस, मौत आ गई..! उफ्फ़…!
महावीर शाह हिंदी सिनेमा के उस दौर के लोकप्रिय कलाकार थे, जब फिल्मों के पोस्टरों पर हीरो-हीरोइन के नाम सबसे बड़े अक्षरों में लिखे जाते थे, मगर उन्हीं पोस्टरों के कोनों में कहीं-न-कहीं कुछ ऐसे चेहरे भी होते थे जो कहानी की रीढ़ बनते थे। महावीर शाह उन्हीं चेहरों में से एक थे—एक ऐसे अभिनेता, जिसे आप पहचानते तो तुरंत थे, मगर नाम ज़ुबान पर थोड़ा देर से आता था… और जब आता था, तो उसके साथ एक अलग भाव भी आता था।
अक्सर पुलिस अफसर, वकील या किसी तेज़-तर्रार नकारात्मक किरदार के रूप में परदे पर दिखाई देने वाले महावीर शाह ने भले ही मुख्य भूमिकाएं कम निभाईं, लेकिन अपने हुनर की वजह से उन्होंने हर छोटे किरदार को खास बना दिया। यही किसी असली अभिनेता की पहचान होती है।
5 अप्रैल 1960 को बॉम्बे (अब मुंबई) में जन्मे महावीर शाह का अभिनय से रिश्ता बचपन से ही जुड़ गया था। गुजराती हिंदू परिवार में पले-बढ़े महावीर ने रंगमंच से अपने सफर की शुरुआत की, वही रंगमंच जो किसी भी अभिनेता की असली पाठशाला होता है। मंच पर कई नाटकों में काम करते-करते उनकी आवाज़, उनकी देह-भाषा और उनकी आंखों की तीक्ष्णता धीरे-धीरे परदे के लिए तैयार होती चली गई।
हिंदी सिनेमा में उनका पहला कदम फिल्म ‘अब क्या होगा’ से पड़ा। महावीर शाह ने धीरे-धीरे अपने लिए एक स्थायी जगह बना ली। आगे चलकर उन्होंने हिंदी और गुजराती फिल्मों के साथ-साथ टेलीविजन में भी लगातार काम किया। टीवी पर उनकी मौजूदगी ‘ज़ी हॉरर शो’ जैसे कार्यक्रमों से और मज़बूत हुई।
महावीर शाह उन कलाकारों में थे जो भीड़ में खड़े होकर भी अलग पहचान बना लेते थे। ‘अंकुश’, ‘दयावान’, ‘तेज़ाब’, ‘नरसिम्हा’, ‘शोला और शबनम’, ‘तिरंगा’, ‘राजा बाबू’, ‘कुली नं. 1’, ‘जुड़वा’, ‘बड़े मियां छोटे मियां’ और ‘मेहंदी’ जैसी फिल्मों में उनकी मौजूदगी उस दौर के सिनेमा का एक परिचित और भरोसेमंद रंग बन चुकी थी। और, खास तौर पर ‘पुलिस और मुजरिम’, ‘यस बॉस’ और ‘बादशाह’ जैसी फिल्मों का उल्लेख अलग से किया जाना चाहिए, क्योंकि इन फिल्मों ने दर्शकों की यादों में उनके चेहरे को स्थायी रूप से दर्ज कर दिया।
दिलचस्प ये भी है कि महावीर को सिर्फ खलनायकी के लिए ही नहीं, बल्कि गंभीर और हास्य—दोनों तरह के किरदारों के लिए याद किया जाता है। यह बहुमुखी प्रतिभा ही थी जिसने उन्हें 86 से ज्यादा फिल्मों और दो टेलीविजन धारावाहिकों तक सक्रिय बनाए रखा। उनकी अंतिम रिलीज़ फिल्म ‘आज का अंधा कानून’ रही, जो उनके निधन के बाद प्रदर्शित हुई।
महावीर शाह का निजी जीवन भी उतना ही सादा और स्थिर था जितना उनका अभिनय सधा हुआ। उन्होंने चेतना शाह से विवाह किया और एक बेटे-एक बेटी के पिता बने। रंगमंच से शुरू हुआ उनका सफर परिवार और काम, दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने की एक खूबसूरत मिसाल भी रहा।
लेकिन नियति को शायद यह सफर इतना ही मंजूर था। साल 2000 में अमेरिका की दो महीने की छुट्टियों की यात्रा के दौरान एक कार दुर्घटना में उनका असमय निधन हो गया। एक ऐसा अभिनेता, जो अभी और कई किरदारों में ढल सकता था, अचानक परदे से ओझल हो गया।
आज जब हम 80-90 के दशक की फिल्में देखते हैं और किसी सख्त पुलिस अफसर या चालाक वकील के रूप में महावीर शाह स्क्रीन पर नजर आते हैं, तो महसूस होता है कि हिंदी सिनेमा की असली ताकत सिर्फ उसके नायकों में नहीं, बल्कि उन भरोसेमंद चेहरों में भी रही है जो कहानी को सच्चाई देते हैं।
महावीर शाह उन्हीं भरोसेमंद चेहरों में से एक थे—कम बोलने वाले, ज्यादा असर छोड़ने वाले अभिनेता। और शायद यही वजह है कि उनका नाम आज भी याद आता है… बिल्कुल वैसे ही जैसे किसी पुराने सिनेमा-हॉल की लॉबी में टंगी वह तस्वीर, जिसे देखकर आप ठिठक तो जरूर जाते हैं।
महावीर शाह
जन्म – 5 अप्रैल 1960 – बंबई (अब मुंबई)
निधन – 31 अगस्त 2000 – शिकागो (अमेरिका)








