Taaki Sanad Rahe: जिम कॉर्बेट की आईमैक्स फ़िल्म वाली अनसुनी कहानी

मेरे पास आओ मेरे दोस्तों, एक क़िस्सा सुनाऊं…नहीं, नहीं। मैं आपको फ़िल्म ‘मिस्टर नटवरलाल’ के लिए गाया अभिनेता अमिताभ बच्चन का पहला प्लेबैक सॉन्ग नहीं सुना रहा। मैं आपको क़िस्सा सुनना चाह रहा हूं उस शख़्स का जिसने देश का पहला वन्यजीव अभयारण्य बनवाने में अहम किरदार निभाया और वह भी देश की आज़ादी से भी कोई 13 साल पहले साल1934 में।

ये वही शख़्स है जिसने बर्मा जाकर ब्रिटिश और अमेरिकी सैनिकों को ऐसे ऐसे गुर सिखाए कि एक फ़ौज़ी ने उसके बारे में लिखा, “कॉर्बेट किसी जादूगर और किसी माहिर जासूस का मिला-जुला रूप लगते थे।” और, ये इसलिए क्योंकि, इस शख़्स ने विदेशी फ़ौजियों को जो सिखाया, वह किसी जादू से कम नहीं है।

और, ये शख़्स भारतीय नहीं था। ये तो उस दंपती की तीसरी पीढ़ी की संतान था, जो अपने-अपनी अपनी धार्मिक संस्थाओं में रहते हुए प्रेम में पड़े और शादी करने के लिए वहां से भागकर भारत आ गए।

इस शख़्स का नाम है, जिम कॉर्बेट और जिसके नाम पर बना है, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क। आप शायद ये जानकर भी चौंक जाएं कि जिम कॉर्बेट के नाम पर टाइगर की एक सब स्पीशीस का नामकरण भी हुआ, पैंथेरा टाइग्रिस कॉरबेटी…!

कॉर्बेटनेबर्माकेजंगलोंमेंजानेवालेब्रिटिशऔरअमेरिकीसैनिकोंकोकईतरहकीट्रेनिंगदीथी।उन्होंने सैनिकों को सिखाया कि जंगल में पीने का साफ पानी कैसे ढूंढा जाता है, ज़हरीले सांपों और खाने लायक पौधों की पहचान कैसे करें, छोटे जानवरों को कैसे फंसाएं, घाव, बुखार और पेट की तकलीफ के लिए जंगल की जड़ी-बूटियों से दवा कैसे बनाएं, और सरकंडे में फूंक मारकर कैसे संदेश पहुंचाया जाए?

उन्होंने सैनिकों को यह भी सिखाया गया कि जंगल में रास्ता कैसे पहचानें, आवाज़ों की सही दिशा कैसे पकड़ें, और चारों तरफ़ नज़र कैसे बनाए रखें। कॉर्बेट यह भी दिखाते थे कि पगचिन्ह देखकर कैसे पता लगाया जा सकता है कि कितने दुश्मन गुज़रे हैं, कब गुज़रे हैं, कितनी तेज़ी से जा रहे थे, और यहां तक कि उनकी बंदूकें भरी हुई थीं या नहीं।

कॉर्बेट का जन्म नैनीताल में हुआ। बचपन से ही वह भारत के जंगलों में घूमते और शिकार करते थे। उन्होंने अपना पहला आदमखोर जानवर 1907 में मारा और अगले करीब चालीस साल तक ऐसे कई आदमखोर जानवरों का शिकार करते रहे।

चंपावत का बाघ, रुद्रप्रयाग का तेंदुआ और पनार का तेंदुआ, जैसे कई आदमखोर जानवरों ने कुमाऊं और गढ़वाल इलाकों में सैकड़ों लोगों की जान ले ली थी, जिन्हें बाद में कॉर्बेट ने मार गिराया।उनकी किताब ‘मैन-ईटर्स ऑफ कुमाऊं’ दुनिया भर में बहुत मशहूर हुई। इसके बाद उन्होंने कई और किताबें लिखीं और इस किताब पर 1948 में हॉलीवुड फिल्म भी बनी।

कॉर्बेट के दादा-दादी जोसेफ और हैरियट कॉर्बेट आयरलैंड के बेलफास्ट से भागकर भारत आए थे। उस समय जोसेफ एक मठ में पढ़ रहे थे और हैरियट नन बन चुकी थीं। दोनों के नौ बच्चे हुए। इनमें से छठे बेटे क्रिस्टोफर विलियम कॉर्बेट का जन्म मेरठ में हुआ था।

1862 में क्रिस्टोफर विलियम को नैनीताल का पोस्टमास्टर बनाया गया। वहां उनके नौ बच्चे हुए और उन्होंने अपनी बहन के चार बच्चों की भी परवरिश की।एडवर्ड जेम्स कॉर्बेट उनका आठवां बच्चा था, जिसका जन्म 25 जुलाई 1875 को नैनीताल में हुआ।

बचपन में कॉर्बेट की देखभाल उनकी मां, बड़ी बहनों और घर के नौकरों ने की। नौकरों से उन्होंने स्थानीय भाषाएं, हिंदू परंपराओं की बुनियादी बातें और कुछ स्थानीय मान्यताएं भी सीखीं।

 

उन दिनों कॉर्बेट परिवार की आय इसकी संख्या के हिसाब से ज़्यादा नहीं थी, इसलिए उनकी मां मैरी जेन ने ज़मीन-जायदाद में समझदारी से निवेश करके घर चलाने में मदद की। कहा जाता है कि वह नैनीताल की पहली प्रॉपर्टी एजेंट थी।

कॉर्बेट ने अपनी पढ़ाई नैनीताल के ओक ओपनिंग्स स्कूल से शुरू की। वहीं कैडेट ट्रेनिंग के दौरान उनकी निशानेबाज़ी इतनी अच्छी थी कि उन्हें सेना की मार्टिनी-हेनरी राइफल इस्तेमाल करने के लिए दी गई।कुछ ही समय बाद उन्होंने इसी राइफल से अपना पहला बड़ा शिकार, एक तेंदुआ, मार गिराया।

 

17 साल की उम्र में उन्होंने बिहार में ईंधन निरीक्षक की नौकरी शुरू की, जहां उन्हें महीने के 100 रुपये मिलते थे। ईंधन निरीक्षक का मतलब उन दिनों था, जंगलों का कटान करके लकड़ी से चलने वाले इंजनों के लिए ईंधन इकट्ठा करना। बाद में 1895 में उन्हें मोकामा घाट पर गंगा पार माल ढुलाई का बड़ा ठेका मिला और वह अगले 22 साल तक यह काम संभालते रहे।

 

जिम कॉर्बेट का जन्म भले भारत में हुआ लेकिन वह ब्रिटेन के प्रति अपनी वफ़ादारी दिखाने का कोई मौक़ा चूकते नहीं थे। दूसरे बोअर युद्ध के समय उन्होंने सेना में भर्ती होने की कोशिश की, लेकिन रेलवे ने उन्हें नौकरी से जाने नहीं दिया।1914 में पहले विश्व युद्ध के दौरान भी शुरुआत में उन्हें उम्र ज़्यादा होने के कारण भर्ती नहीं किया गया। बाद में 1917 में उन्हें कैप्टन बनाया गया।उन्होंने कुमाऊं से 5000 मजदूरों की एक टुकड़ी बनाई, जिनमें से 500 लोगों की एक खास यूनिट उन्होंने बनाई, जिसका नाम था 70वीं कुमाऊँ कंपनी। स्थानीय लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता को देखते हुए कॉर्बेट को 1919 में तीसरे एंग्लो-अफगान युद्ध के दौरान फिर सेना ने बुलाया।

दूसरे विश्व युद्ध के समय उन्होंने फिर सेना में जाने की इच्छा जताई, लेकिन उम्र ज़्यादा होने के कारण सेना ने इसके लिए मना कर दिया। हालांकि, बाद में 1944 में उनका ज्ञान देखते हुए उन्हें छिंदवाड़ा में जंगल प्रशिक्षण का वरिष्ठ प्रशिक्षक बनाया गया और लेफ्टिनेंट कर्नल का पद दिया गया। इसी दौरान उन्होंने बर्मा के जंगलों में जाकर ब्रिटेन और अमेरिका के सैनिकों को वहां के गुर सिखाए।

1944 में ही उनकी मशहूर किताब ‘मैन-ईटर्स ऑफ कुमाऊंट प्रकाशित हुई, जिसमें 1900 से 1930 के बीच उनके शिकार के अनुभव बताए गए हैं।1946 में इस किताब पर फिल्म बनाने के अधिकार खरीदे गए और 1948 में इस पर एकफ़िल्म बनी। बाद में 1986 में बीबीसी ने “मैन-ईटर्स ऑफ इंडिया” नामक डॉक्यू-ड्रामा बनाया और 2002 में “इंडिया: किंगडम ऑफ द टाइगर” नाम की आईमैक्स फिल्म भी बनी।

भारत के अलग अलग ठिकानों पर काम करने के दौरान कॉर्बेट के दो अफेयर रहे। पहला अफेयर तो उनका पहाड़ों पर ही एक 19 साल की अंग्रेज़ लड़की से हो गया था, लेकिन तब उनकी बहन ने ही इसमें भेंग मार दी। दूसरा अफ़ेयर उनका एक शादीशुदा महिला से चला और लंबा चला। हालांकि, जिम कॉर्बेट आजीवन अविवाहित रहे।

1947 में भारत के राजनीतिक माहौल और अपनी खराब सेहत को देखते हुए जिम कॉर्बेट ने नैनीताल का अपना घर बेच दिया और नौ दिन बाद केन्या चले गए। नैनीताल शहर को ठीक से विकसित करने और उसकी नागरीय प्रशासन व्यवस्था को मजबूत बनाने में जिम कॉर्बेट का बड़ा हाथ रहा है।

जिम कॉर्बेट
जन्म – 25 जुलाई 1875 – नैनीताल
निधन – 19 अप्रैल 1955– न्येरी, कीनिया

  • Related Posts

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    Raghu Rai: मशहूर फोटोग्राफर रघु राय का निधन, 83 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस

    Raghu Rai: मशहूर फोटोग्राफर रघु राय का निधन, 83 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस

    कृतिका कामरा की कातिलाना अदाएं

    कृतिका कामरा की कातिलाना अदाएं

    सनी लियोनी का ग्लैमरस अंदाज

    सनी लियोनी का ग्लैमरस अंदाज

    Khalnayak Returns: कौन है मोहित कम्बोज? जिनकी कंपनी बना रही ‘खलनायक रिटर्न्स’

    Khalnayak Returns: कौन है मोहित कम्बोज? जिनकी कंपनी बना रही ‘खलनायक रिटर्न्स’

    ‘M4M’ का ट्रेलर लॉन्च: कातिल पहचानो और जीतो 1 लाख रुपये, अमेरिकन एक्ट्रेस जो शर्मा का बॉलीवुड डेब्यू

    ‘M4M’ का ट्रेलर लॉन्च: कातिल पहचानो और जीतो 1 लाख रुपये, अमेरिकन एक्ट्रेस जो शर्मा का बॉलीवुड डेब्यू

    Pooja Hegde: सुपरस्टार अनेक, नतीजा हर बार एक! कमाल की कन्सिस्टेंसी है…

    Pooja Hegde: सुपरस्टार अनेक, नतीजा हर बार एक! कमाल की कन्सिस्टेंसी है…