Raghu Rai: भारत के सबसे प्रतिष्ठित और जाने-माने फोटोग्राफर रघु राय अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके बेटे और स्वयं एक प्रसिद्ध फोटोग्राफर, नितिन राय के अनुसार उनके पिता पिछले दो वर्षों से कैंसर से जंग लड़ रहे थे। प्रोस्टेट कैंसर और पेट के कैंसर को मात देने के बाद हाल ही में कैंसर उनके मस्तिष्क तक फैल गया था। इसके साथ उम्र संबंधी अन्य समस्याएं भी थीं। इन्हीं कारणों से रविवार को दिल्ली के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया।

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बड़े भाई से सीखीं बारीकियां

रघु राय (Raghu Rai) का जन्म 1942 में अविभाजित भारत के पंजाब (अब पाकिस्तान में स्थित झंग) में हुआ था। उन्होंने फोटोग्राफी की बारीकियां 1962 में अपने बड़े भाई एस. पॉल से सीखीं। 1965 में ‘द स्टेट्समैन’ अखबार से अपने करियर की शुरुआत करने वाले रघु राय ने जल्द ही अपनी एक अलग पहचान बना ली थी। 1968 में उनकी महर्षि महेश योगी के आश्रम की तस्वीरों ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। उस समय वहां मशहूर ब्रिटिश बैंड ‘द बीटल्स’ मौजूद था। उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1977 में महान फ्रांसीसी फोटोग्राफर हेनरी कार्टियर-ब्रेसन ने उन्हें दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित फोटोग्राफी एजेंसी ‘मैग्नम फोटोज’ के लिए नामांकित किया था।

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‘पद्म श्री’ से सम्मानित थे रघु

रघु राय (Raghu Rai) ने अपने करियर के दौरान भारत की कई ऐतिहासिक घटनाओं को अपने कैमरे में कैद किया। 1971 के बांग्लादेश युद्ध की उनकी बेजोड़ कवरेज के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1972 में पद्म श्री से सम्मानित किया। 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के उनके दस्तावेजीकरण और उस पर आधारित उनकी पुस्तक ‘एक्सपोजर ए कॉर्पोरेट क्राइम’ को आज भी पत्रकारिता की दुनिया का एक मील का पत्थर माना जाता है।

उनके प्रमुख काम

रघु राय ने ‘इंडिया टुडे’ और ‘संडे’ जैसी प्रमुख पत्रिकाओं में पिक्चर एडिटर के रूप में अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने भारत के लोगों, संस्कृति और शहरों पर 18 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित कीं, जिनमें ‘Raghu Rai’s India: Reflections in Colour’ प्रमुख है। उनका काम ‘टाइम’, ‘लाइफ’, ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’, ‘न्यूज़वीक’ और ‘द न्यूयॉर्कर’ जैसी विश्व प्रसिद्ध पत्रिकाओं में प्रमुखता से प्रकाशित हुआ।