फ़िल्मी हूं नेटवर्क, मुंबई: दक्षिण भारतीय सिनेमा में पिछले कुछ वर्षों में जिस तेजी से नए चेहरों ने अपनी जगह बनाई है, उनमें श्रीलीला का नाम खास तौर पर उभरकर सामने आता है। कम समय में उन्होंने तेलुगु और कन्नड़ फ़िल्म इंडस्ट्री में ऐसी मौजूदगी दर्ज कराई है, जो सिर्फ़ ग्लैमर तक सीमित नहीं है। उनकी फिल्मोग्राफी पर नज़र डालें तो साफ़ दिखता है कि उन्होंने बहुत सोच-समझकर अलग-अलग तरह की कमर्शियल फिल्मों को चुना, जिनमें नाच-गाने के साथ-साथ स्क्रीन प्रेज़ेन्स भी अहम रही।
उनका पहला बड़ा ब्रेक कन्नड़ फ़िल्म ‘किस’ से आया, जिसमें वह एक फ्रेश और आत्मविश्वासी नई अभिनेत्री के रूप में सामने आईं। इस फ़िल्म ने उन्हें पहचान दी और इंडस्ट्री का ध्यान उनकी तरफ खींचा। इसके बाद तेलुगु सिनेमा में ‘पेल्ली सन्दडी’ ने उनके करियर को नई दिशा दी, जहाँ उन्होंने लीड एक्ट्रेस के तौर पर अपनी पकड़ मजबूत की। यह वह दौर था, जब श्रीलीला ने यह साबित कर दिया कि वह सिर्फ़ एक लॉन्च नहीं, बल्कि एक संभावनाओं से भरी नई स्टार हैं।

तेलुगु फिल्मों में उनका सफ़र तेजी से आगे बढ़ा। ‘धमाका’ में रवि तेजा के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने पसंद किया, और फिल्म की सफलता ने उन्हें कमर्शियल सिनेमा की रेस में आगे ला खड़ा किया। इसके बाद ‘भगवंत केसरी’ में नंदमुरी बालकृष्ण के साथ उनकी मौजूदगी और ‘गुंटूर कारम’ में महेश बाबू के अपोज़िट काम करना, यह दिखाता है कि वह तेजी से बड़े सितारों के साथ स्क्रीन शेयर करने लगीं। उनकी खासियत यह रही कि वह हर फिल्म में अपनी एनर्जी और डांस के जरिए अलग छाप छोड़ती रहीं।
चौथे पड़ाव पर बात करें तो ‘पुष्पा 2: द रूल’ में उनका आइटम डांस उनके करियर का एक अलग ही अध्याय बनकर सामने आया। पुष्पा 2: द रूल में इस विशेष गीत में उनकी मौजूदगी ने उन्हें पैन-इंडिया दर्शकों के बीच और ज्यादा पहचान दिलाई। जिस तरह से उन्होंने स्क्रीन पर अपनी एनर्जी और डांसिंग स्किल्स का प्रदर्शन किया, उसने यह साफ़ कर दिया कि वह सिर्फ़ लीड रोल तक सीमित रहने वाली अभिनेत्री नहीं हैं, बल्कि हर तरह के कमर्शियल फ़ॉर्मेट में फिट बैठने की क्षमता रखती हैं।
अब हिंदी सिनेमा की ओर बढ़ते हुए, श्रीलीला को बॉलीवुड में भी मौके मिलने शुरू हो चुके हैं। यह स्वाभाविक भी है, क्योंकि दक्षिण की सफलता के बाद हिंदी फिल्म इंडस्ट्री हमेशा ऐसे चेहरों की तलाश में रहती है, जो पैन-इंडिया अपील रखते हों। इसी कड़ी में उनकी जोड़ी कार्तिक आर्यन के साथ बन रही एक नई फिल्म में देखने को मिलेगी, जिसकी चर्चा इंडस्ट्री में पहले से है। यह फिल्म उनके करियर का अहम मोड़ साबित हो सकती है, क्योंकि यहीं से उनका हिंदी दर्शकों के साथ सीधा संवाद स्थापित होगा।
आख़िर में, श्रीलीला का एक और पहलू उन्हें बाकी अभिनेत्रियों से अलग करता है, उनकी पढ़ाई और निजी जीवन। अभिनय के साथ-साथ उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई भी जारी रखी और डॉक्टर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया। उनका पारिवारिक बैकग्राउंड भी शिक्षित और सांस्कृतिक रहा है, जिसने उन्हें जमीन से जुड़े रहने में मदद की। यही संतुलन, एक तरफ ग्लैमर की दुनिया और दूसरी तरफ पढ़ाई व निजी अनुशासन, उन्हें एक अलग पहचान देता है। श्रीलीला की कहानी अभी अधूरी है, लेकिन जिस रफ्तार से वह आगे बढ़ रही हैं, वह संकेत देती है कि आने वाले समय में उनका नाम और भी बड़े दायरे में सुना जाएगा।






