सुपरस्टार विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ के लीक होने से न केवल इसके निर्माता परेशान हैं, बल्कि पूरी भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में गुस्से की लहर है। इस गंभीर संकट को देखते हुए फिल्म निर्माताओं के सबसे पुराने और बड़े संगठन इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (इंपा) ने अब सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग की है। इंपा ने पीएम को पत्र लिखकर इस डिजिटल चोरी के खिलाफ तत्काल और कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
डिजिटल दौर में पायरेसी का दीमक
इंपा के अध्यक्ष अभय सिन्हा ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एक तरफ भारतीय फिल्म उद्योग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी आधुनिक तकनीक की ओर कदम बढ़ा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ हम पायरेसी जैसी पुरानी और बुनियादी समस्या से निपटने में अब भी नाकाम हैं।
पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि टेलीग्राम, टोरेंट और अन्य अवैध वेबसाइटें बेखौफ होकर फिल्मों की स्ट्रीमिंग कर रही हैं। बार-बार शिकायतों के बावजूद इन प्लेटफॉर्म्स पर कोई प्रभावी लगाम नहीं लगाई गई है, जिससे निर्माताओं पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है और कई लोग बर्बादी की कगार पर पहुंच गए हैं।
सेंसर बोर्ड की देरी ने बढ़ाई मुश्किलें
इंपा ने ‘जन नायकन’ के मामले पर विशेष ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि फिल्म लंबे समय से बनकर तैयार है। इसे मूल रूप से 9 जनवरी 2026 को रिलीज होना था, लेकिन सेंसर प्रमाणन में हो रही देरी और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण इसे अब तक सिनेमाघरों में रिलीज नहीं किया जा सका है। निर्माताओं का मानना है कि रिलीज में हो रही इस देरी का फायदा पायरेसी माफिया उठा रहे हैं, जो फिल्म की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गया है।
क्या पायरेसी माफिया पर कसेगा शिकंजा?
फिल्म जगत के जानकारों का कहना है कि अगर प्रधानमंत्री इस मामले में हस्तक्षेप करते हैं तो पायरेसी को रोकने के लिए कड़े कानून और तकनीकी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। ‘जन नायकन’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि हजारों लोगों की मेहनत और करोड़ों रुपयों का निवेश है। अब पूरी इंडस्ट्री की नजरें केंद्र सरकार के रुख पर टिकी हैं कि वे इस सिस्टम की विफलता को कैसे सुधारते हैं।








