Nadaaniyan Review: ओटीटी प्लेटफॉर्म 7 मार्च को ‘नादानियां’ आखिरकार रिलीज हो गई। इस फिल्म से एक और स्टारकिड ने बॉलीवुड में कदम रखा है। हम बात इब्राहिम खान की कर रहे हैं। अपनी पहली फिल्म में अभिनय से इब्राहिम छाप नहीं छोड़ सके हैं। फिल्म की कहानी भी औसत दर्जे की है। फिल्म में लोगों को कुछ भी नया देखने को नहीं मिलने वाला है। सुहाना खान, खुशी कपूर, अगस्त्य नंदा, जुनैद खान और अब सैफ अली खान के बेटे इब्राहिम अली खान की डेब्यू फिल्म को भी सीधा ओटीटी पर रिलीज किया गया है।
फिल्म में नया कुछ नहीं
‘नादानियां’ की कहानी इब्राहिम अली खान और खुशी कपूर के बीच के प्यार और उसके बाद तकरार और फिर हैप्पी एंडिंग तक सीमित है। फिल्म में खुशी कपूर का किरदार एक अमीर परिवार से आता है, जबकि इब्राहिम अली खान को एक मिडिल क्लास फैमिली का दिखाया गया है। फिल्म में खुशी कपूर एक किराए के बॉयफ्रेंड की मदद अपने बचपन के दोस्तों की गलतफहमी को दूर करने के लिए लेती हैं। लेकिन धीरे-धीरे दोनों के बीच दोनों के बीच प्यार हो जाता है, लेकिन जैसे ही कहानी आगे बढ़ती है दोनों के बीच तकरार भी हो जाता है। हालांकि, दोनों के मिलन से फिल्म का समापन भी हो जाता है।
अदाकारी मे नहीं दिखा दम
इस फिल्म की कहानी बेहद साधारण है। उससे भी ज्यादा साधारण इब्राहिम अली खान और खुशी कपूर की अदाकारी है। यह इब्राहिम की पहली फिल्म है, जिसकी वजह से उनके अभिनय में खामियां नजर आती हैं, लेकिन खुशी कपूर की यह तीसरी फिल्म है, फिर भी वह पूरी फिल्म में एक ही तरह के एक्स्प्रेशन के साथ नजर आती हैं।
न संगीत अच्छा न निर्देशन
फिल्म का निर्देशन शौना गौतम ने किया है। यह उनकी पहली फिल्म है, लेकिन इसे देखकर लगता है कि नादानियां के लिए उन्होंने कोई खास मेहनत नहीं की है। फिल्म की कहानी में न तो दर्शकों को बांधे रखने का दम है और न ही इब्राहिम और खुशी की अदाकारी में। हां, सहायक भूमिकाओं में दीया मिर्जा, महिमा चौधरी और जुगल हंसराज ने अच्छा काम किया है। रही सही कसर फिल्म का संगीत पूरा कर देती है। इस फिल्म का कोई भी गाना ऐसा नहीं है, जो फिल्म खत्म होने के बाद भी दर्शकों के दिमाग में गूंजता रहे। इसे देखने के बाद यही कहा सकता है कि मेकर्स ने इसे बनाने में कर दी है बड़ी नादानियां।








