फ़ाइनली आज मैंने यशराज फ़िल्म्स की लेटेस्ट फ़िल्म ‘मर्दानी 3’ देख ली। देश के महान गणितज्ञ रामानुजन के नाम का यहां एक विलेन है, जिसे बचपन में बढ़िया गणित आती है और बड़े होने पर बढ़िया शेयर मार्केट। गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन अयंगर के प्रचलित नाम, रामानुजन के नाम पर एक हिंदी फ़िल्म के विलेन का नाम रखना ही इस फ़िल्म का सबसे बड़ा टर्न ऑफ़ है।
रामानुजन नाम, फ़िल्म ‘मर्दानी 3’ के लेखक/लेखकों ने शायद इसे राम और रावण की संधि करके सोचा होगा, कुछ कुछ वैसा ही किरदार भी गढ़ा गया है। लेकिन, फ़िल्म की कहानी दमदार नहीं है। और, बहुत ही प्रिडेक्टिबल है। त्रेता, लंका, सबका इस्तेमाल करके भी इसकी राइटिंग टीम फ़िल्म की लंका लगने से बचा नहीं पाई है।
वैसे, फ़िल्म रिलीज़ होते ही इसे कमाल की फ़िल्म बताने वालों और तीन स्टार से लेकर साढ़े तीन और चार स्टार देने वालों का ज़िक्र, यशराज फ़िल्म्स ने अपने सोशल मीडिया कवर्स में किया है।
फ़िल्मों के रिव्यूज़ की रेटिंग का खेल क्या होता है और कैसे मैंने इसमें शामिल होने से इनकार करके ‘अमर उजाला’ जैसे अख़बार के लिए लिखना बंद किया, इस पर विस्तार से चर्चा जल्द ही करूंगा। लेकिन, सच ये है कि मेरा मन इस फ़िल्म का ट्रेलर देखने के बाद भी इसे देखने के लिए उत्साहित नहीं हुआ था। लेकिन, हाल ही में बच्चों के गायब होने की खबरों की एकाएक आई जिस बाढ़ के बाद, दिल्ली और मुंबई पुलिस को चेतावनियां जारी करनी पड़ीं, उसने मुझे ये फ़िल्म देखने के लिए थियेटर पहुंचा दिया।
आज फ़िल्म ‘मर्दानी 3’ की रिलीज़ के दूसरे हफ़्ते का आख़िरी दिन है। फ़िल्म का कुल बजट हिंदी सिनेमा की ट्रेड न्यूज़ देने वाले पोर्टल्स के मुताबिक़, करीब 60 करोड़ रुपये है। फ़िल्म की ओपनिंग इसके कुल बजट की 10 फ़ीसदी भी नहीं रही लेकिन रिलीज़ का पहला इतवार आते आते ही फ़िल्म ने ‘हिट’ का तमगा अपने आप पहनना शुरू कर दिया। फिर, खबरें फैली कि ‘मर्दानी 3’ इस फ्रेंचाइज़ी की पहले की फ़िल्मों ‘मर्दानी’ और ‘मर्दानी 2’ से बेहतर कारोबार कर रही है।
मैंने थोड़ा और खंगाला तो पता चला कि इस हिसाब से तो ये ‘वीर ज़ारा’ से भी बेहतर कारोबार कर चुकी है। लेकिन, कंपेरिज़न करने वालों ने अगर रुपये की वैल्यू डॉलर के मुकाबले निकालकर कर या तब के सोने की क़ीमत और आज के सोने की क़ीमत ध्यान में रखते हुए कंपेरिज़न किया होता तो उनके सामने पिक्चर थोड़ा और साफ़ हो पाती।
ख़ैर, ग्रोक की मानें तो किसी फ़िल्म के हिट होने के लिए उसकी मजबूत लाभप्रदता, निवेश पर लगभग सौ फ़ीसदी से ज्यादा रिटर्न, यानी कि लागत के दोगुनी या उससे अधिक कमाई और बिना किसी बड़ी कंट्रोवर्सी के इसका ऑर्गेनिक रूप से सफल होना ज़रूरी है।
फ़िल्म ‘मर्दानी 3’ का इंडिया नेट कलेक्शन करीब 39.8 से लेकर 41.3 करोड़ रुपये या इससे एक-दो करोड़ ऊपर नीचे ही है। ये आंकड़े Sacnilk और Koimoi जैसी ट्रेड वेबसाइट्स के हैं। फ़िल्म की दुनिया भर में कुल (ग्रॉस) कमाई भी अभी 60 करोड़ रुपये से नीचे ही है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो फ़िल्म ‘मर्दानी 3’ रानी मुखर्जी की फ़िल्मों की वर्ल्डवाइड रैंकिंग में पहली और दूसरी ‘मर्दानी’ से भले बेहतर कारोबार कर रही हो लेकिन उनके और इसके बजट की तुलना करने पर तस्वीर दूसरी तरफ डोल जाती है। फ़िल्म का लाइफ़टाइम नेट बॉक्स ऑफिस कलेक्शन शायद इसकी लागत के आसपास ही रहे या फिर उससे भी नीचे। मेरी तो दुआ है कि फ़िल्म कम से कम सौ करोड़ कमाए, लेकिन हर दुआ इस दौर में क़ुबूल भी कहां होती है!
और, अगर आपको ‘टाइगर 3’ का नेट बॉक्स ऑफिस कलेक्शन याद हो तो फिल्म के अपने बजट से भी कम कलेक्शन के बाद ही स्पाई सीरीज़ की घोषित फ़िल्म ‘टाइगर वर्सेस पठान’ ठंडे बस्ते में चली गई थी। जो फ़िल्म अपनी लागत की कम से कम दो गुनी और गिरी हालत में डेढ़ गुनी रकम भी नेट बॉक्स ऑफिस कलेक्शन में न कमा सके, उसे हिट का तमगा देना ट्रेड के गणित के हिसाब से तो ठीक नहीं है। देखते हैं अब ‘अल्फ़ा’ का ऊंट किस करवट बैठता है..!






