24 Review: ‘सूबेदार’ अनिल कपूर की शान पर ‘24’ ने लगाया बट्टा

Web Series Review : 24

कलाकार: अनिल कपूरनील भूपालमराघव चाननाअनीता राजसपना पब्बीमंदीरा बेदीटिस्का चोपड़ा आदि

निर्देशक: रेंसिल डीसिल्वानिवेदिता बसुअभिनय देवकरण बुलानीनित्या मेहराजिजी फ़िलिप 

लेखक: रॉबर्ट कोक्रेन और रेंसिल डीसिल्वा 

निर्माता: अनिल कपूर 

स्टूडियो: JioHotstar

रिलीज़ डेट: 24 अप्रैल 2026 

रेटिंग: ★★☆☆☆ (2/5)

क्या ही जानदार ओटीटी फ़िल्म रही अनिल कपूर की सूबेदार’! और, क्या ही थकी हुई सीरीज़ निकली अनिल कपूर की ‘24’ ! टेलीविज़न पर दो सीज़न में आ चुकी ये वेब सीरीज़ अब ओटीटी पर आई है, और इसे देखकर लगता है कि अनिल कपूर ने आख़िर इसे करने के लिए हमी क्यों भरी होगी?

दरअसल, अनिल कपूर के लिए ‘24’ का नया सीज़न सिर्फ़ एक वापसी नहींबल्कि उनकी ओटीटी यात्रा का अहम पड़ाव है। बड़े परदे पर दशकों से सक्रिय रहने के बाद उन्होंने डिजिटल दौर में भी ख़ुद को प्रासंगिक बनाए रखा है। 

हिंदी सिनेमा में उनकी स्थिति आज भी सम्मानित वरिष्ठ सितारे की हैमगर युवा दर्शकों के बीच लगातार बने रहने के लिए उन्हें नए प्रयोगों की ज़रूरत थी। ऐसे में ‘24’ की वापसी उनके लिए ब्रांड पुनर्स्थापना की तरह देखी जा सकती है। 

असल जीत यह है कि अनिल कपूर ने ‘24’ जैसी महत्वाकांक्षी सीरीज़ को फिर से चर्चा में ला खड़ा किया। भारतीय दर्शकों के लिए रियल-टाइम थ्रिलर फ़ॉर्मेट आज भी आसान नहीं माना जातालेकिन उन्होंने इसे बड़े सितारोंसशक्त सहकलाकारों और तेज़ रफ़्तार कथानक के साथ फिर पेश किया। 

सीरीज़ की पिछली कड़ियों में संजय कपूरसाक्षी तंवरसुरवीन चावलाआशिष विद्यार्थी जैसे नाम जुड़े रहेजिससे इसका कैनवस बड़ा बना। जियोहॉटस्टार पर वापसी ने सीरीज़ को नई हाइप दीहालांकि यह हाइप अधिकतर पुरानी यादों और नॉस्टैल्जिया पर आधारित रही। 

सत्ताआतंकवादजैविक ख़तरे और सुरक्षा तंत्र जैसे विषय आज के सियासी माहौल से मेल खाते हैंइसलिए इसकी थीम अब भी सामयिक लगती है। 


सीरीज़ का संदेश राष्ट्र सुरक्षानिजी त्याग और संकट की घड़ी में नेतृत्व पर केंद्रित है। प्रस्तुति बड़े पैमाने की हैकमान्ड सेंटरराजनीतिक गलियारेपीछाविस्फोट और संकट की उलटी गिनती इसे सिनेमाई रूप देते हैं। बजट भी टीवी/ओटीटी मानकों से ऊंचा महसूस होता है और मेहनत स्पष्ट दिखाई देती है। 

मगर समस्या यह है कि इतने संसाधनों के बावजूद यह नई पीढ़ी के दर्शकों को पूरी तरह बांध नहीं पाती। कहानी कई जगह पुरानी शैली की लगती हैसंवादों में ताज़गी कम है और तनाव वैसा असर नहीं छोड़ता जैसा आधुनिक वैश्विक थ्रिलर्स में दिखता है। नतीजतन यह महत्वाकांक्षी होकर भी कई बार भावनात्मक दूरी बनाए रखती है। 


तकनीकी पक्षों में सीरीज़ अब भी सम्मानजनक स्तर पर खड़ी दिखती है। सिनेमैटोग्राफ़ी में नाइट शॉट्सपीछा करने वाले दृश्य और कमांड रूम की बेचैनी प्रभावी ढंग से पकड़ी गई है। कैमरा लगातार गतिशील रहता हैजिससे तात्कालिकता का अहसास बनता है। संगीत और बैकग्राउंड स्कोर में तनाव पैदा करने की कोशिश हैहालांकि कई जगह वह पुराने टीवी थ्रिलर टेम्पलेट जैसा महसूस होता है। 

एक्शन दृश्यों में अनिल कपूर की उम्र के बावजूद ऊर्जा दिखती हैपर कुछ सीन्स में कोरियोग्राफ़ी दोहराव भरी लगती है। कुल मिलाकर तकनीकी विभाग मेहनती हैपर असाधारण नहीं। 

‘24’ एक्शन क्राइम थ्रिलर प्रेमियों के लिए देखने लायक सामग्री तो हैलेकिन आज के ओटीटी युग में यह दोयम दर्ज़े की सीरीज़ से आगे नहीं बढ़ पाती। इसमें स्टार पावर हैपेशेवर प्रोडक्शन है और पुरानी यादों की चमक भी हैमगर ताज़गीगहराई और आधुनिक धार कम है। 

जिन दर्शकों ने इसे पहले नहीं देखावे उत्सुकतावश कुछ एपिसोड देख सकते हैंमगर जो विश्वस्तरीय थ्रिलर की उम्मीद लेकर आएँगेवे निराश हो सकते हैं। ओटीटी पर उपलब्ध बेहतर विकल्पों के बीच इसे आसानी से इग्नोर भी किया जा सकता है।

  • Mohammad Faique

    मेरा नाम मोहम्मद फायक अंसारी है और मैं पिछले 9 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हूं। इस दौरान मुझे समाचार लेखन, संपादन और कंटेंट निर्माण से जुड़ा व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ है। मैंने अमर उजाला के मनोरंजन डेस्क पर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जहां मैंने फिल्म, टेलीविजन और वेब सीरीज़ से जुड़ी विविध सामग्री पर काम किया। वर्तमान में मैं filmihoon.com के साथ जुड़ा हुआ हूं, जहां मैं मनोरंजन जगत से संबंधित समाचारऔर विश्लेषण प्रस्तुत कर रहा हूं।

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